श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.41.3 
न क्रुध्यत्यभिशस्तोऽपि क्रोधनीयानि वर्जयन्।
क्रुद्धान् प्रसादयन् सर्वान् समदु:ख: क्व गच्छति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'वह राम कहाँ जा रहा है जो किसी के द्वारा झूठा आरोप लगाने पर भी कभी क्रोधित नहीं होता था, कभी किसी को क्रोध दिलाने वाली बात नहीं कहता था, तथा जो सब दुःखियों को शान्त करता था और दूसरों के दुःख में सहानुभूति प्रकट करता था?॥3॥
 
'Where is that Ram going who never got angry even when falsely accused by someone, never said things that would make someone angry, and who used to pacify all the upset people and show sympathy in the sorrows of others?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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