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श्लोक 2.41.18  |
न वाति पवन: शीतो न शशी सौम्यदर्शन:।
न सूर्यस्तपते लोकं सर्वं पर्याकुलं जगत्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| शीतल वायु नहीं चल रही थी। चन्द्रमा कोमल नहीं दिख रहा था। सूर्य भी संसार को उचित मात्रा में ऊष्मा या प्रकाश नहीं दे रहा था। समस्त संसार व्याकुल था॥18॥ |
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| There was no cool breeze. The moon did not appear gentle. The sun was also not giving the world the proper amount of heat or light. The entire world was in a state of restlessness.॥ 18॥ |
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