श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.41.15 
अकस्मान्नागर: सर्वो जनो दैन्यमुपागमत्।
आहारे वा विहारे वा न कश्चिदकरोन्मन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अचानक ही सब नागरिक दुःखी हो गए, किसी को खाने-पीने और रहने में कोई रुचि नहीं रही॥15॥
 
Suddenly all the citizens were in a miserable state. No one was interested in eating or living.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)