श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.41.11 
त्रिशङ्कुर्लोहिताङ्गश्च बृहस्पतिबुधावपि।
दारुणा: सोममभ्येत्य ग्रहा: सर्वे व्यवस्थिता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
त्रिशंकु, मंगल, बृहस्पति, बुध तथा शुक्र, शनि आदि सभी ग्रह रात्रि के समय वक्र गति करते हुए चंद्रमा के पास पहुँच गए और भयंकर (क्रूर चमक वाले) हो गए।
 
Trisanku, Mars, Jupiter, Mercury and all the other planets like Venus, Saturn, etc., reached near the Moon in a curved motion at night and became fierce (with a cruel glow).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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