श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.40.9 
रामं दशरथं विद्धि मां विद्धि जनकात्मजाम्।
अयोध्यामटवीं विद्धि गच्छ तात यथासुखम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'पुत्र! तुम श्री राम को अपना पिता मानो, राजा दशरथ को मानो, जनकनन्दिनी सीता को अपनी माता मानो और वन को अयोध्या मानो। अब यहाँ से सुखपूर्वक प्रस्थान करो।'॥9॥
 
'Son! Consider Shri Ram as your father, King Dasharath, consider Janakanandini Sita as your mother, and consider the forest as Ayodhya. Now depart from here happily.'॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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