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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान
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श्लोक 7
श्लोक
2.40.7
इदं हि वृत्तमुचितं कुलस्यास्य सनातनम्।
दानं दीक्षा च यज्ञेषु तनुत्यागो मृधेषु हि॥ ७॥
अनुवाद
‘दान देना, यज्ञ में दीक्षा लेना और युद्ध में शरीर का त्याग करना – यही इस कुल का उचित और सनातन आचरण है’॥7॥
‘Giving charity, taking initiation in yagya and sacrificing one’s body in war – this is the proper and eternal conduct of this clan’. 7॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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