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ramayan 2.40.46: राजा दशरथ चिल्लाते, "सुमन्त्र! रुको।" लेकिन भगवान राम कहते, "आगे बढ़ो, जल्दी बढ़ो।" इन दो आदेशों के बीच फँसा, बेचारे सुमन्त्र का मन दो पहियों के बीच फँसे हुए व्यक्ति की तरह था।   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.40.46 
तिष्ठेति राजा चुक्रोश याहि याहीति राघव:।
सुमन्त्रस्य बभूवात्मा चक्रयोरिव चान्तरा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ चिल्लाते, "सुमन्त्र! रुको।" लेकिन भगवान राम कहते, "आगे बढ़ो, जल्दी बढ़ो।" इन दो आदेशों के बीच फँसा, बेचारे सुमन्त्र का मन दो पहियों के बीच फँसे हुए व्यक्ति की तरह था।
 
King Dasharatha would shout, "Sumantr! Stop." But Lord Rama would say, "Proceed, proceed quickly." Caught between those two orders, poor Sumantr's mind was like a man trapped between two wheels.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)