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ramayan 2.40.37: उस समय राजा को महान् दुःख और कष्ट में डूबा हुआ देखकर श्री रामजी के पीछे चलने वाली प्रजा ने पुनः महान् कोलाहल मचाया॥37॥   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.40.37 
ततो हलहलाशब्दो जज्ञे रामस्य पृष्ठत:।
नराणां प्रेक्ष्य राजानं सीदन्तं भृशदु:खितम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा को महान् दुःख और कष्ट में डूबा हुआ देखकर श्री रामजी के पीछे चलने वाली प्रजा ने पुनः महान् कोलाहल मचाया॥37॥
 
At that time, seeing the King immersed in great sorrow and suffering, the people following Sri Rama once again created a great uproar. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)