श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.40.35 
सुस्राव नयनै: स्त्रीणामस्रमायाससम्भवम्।
मीनसंक्षोभचलितै: सलिलं पङ्कजैरिव॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियों की आँखों से दुःख के आँसू ऐसे गिर रहे थे जैसे मछलियों के उछलने से कमल के फूलों से जल की बूँदें बरसने लगती हैं ॥35॥
 
Tears of grief were falling from the eyes of the women just as water droplets start raining from the lotus flowers when the jumping of fishes causes them to shake. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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