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ramayan 2.40.33: जब महाबाहु श्री राम नगरी से प्रस्थान कर रहे थे, तब नगरवासियों के नेत्रों से गिरे आँसुओं से भीगकर पृथ्वी पर उड़ती धूल शांत हो गई।   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.40.33 
निर्गच्छति महाबाहौ रामे पौरजनाश्रुभि:।
पतितैरभ्यवहितं प्रणनाश महीरज:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब महाबाहु श्री राम नगरी से प्रस्थान कर रहे थे, तब नगरवासियों के नेत्रों से गिरे आँसुओं से भीगकर पृथ्वी पर उड़ती धूल शांत हो गई।
 
When the mighty-armed Sri Rama was leaving the city, the dust rising on the earth became still by being wet by the tears that fell from the eyes of the city dwellers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)