श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.40.31 
स च श्रीमानचिन्त्यात्मा रामो दशरथात्मज:।
सूतं संचोदयामास त्वरितं वाह्यतामिति॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर भगवान् राम के अचिन्त्य रूप दशरथनन्दन ने सुमन्त्र को प्रेरित करके कहा, “रथ को और तेज चलाओ।” 31॥
 
Seeing this, Dashrathanandan, the unimaginable form of Lord Ram, inspired Sumantra and said, “Drive the chariot faster.” 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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