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ramayan 2.40.25: 'हे लक्ष्मण! तुम भी धन्य हो, क्योंकि तुम वन में अपने देवतुल्य भाई की सेवा करोगे, जो सदैव मधुर वचन बोलता है।'   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.40.25 
अहो लक्ष्मण सिद्धार्थ: सततं प्रियवादिनम्।
भ्रातरं देवसंकाशं यस्त्वं परिचरिष्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'हे लक्ष्मण! तुम भी धन्य हो, क्योंकि तुम वन में अपने देवतुल्य भाई की सेवा करोगे, जो सदैव मधुर वचन बोलता है।'
 
'Oh Lakshmana! You too are blessed, because you will serve your god-like brother in the forest, who always speaks sweet words.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)