श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.40.24 
कृतकृत्या हि वैदेही छायेवानुगता पतिम्।
न जहाति रता धर्मे मेरुमर्कप्रभा यथा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'विदेहनन्दिनी सीता पूर्ण हैं, क्योंकि वे पति परायण होकर छाया की भाँति अपने पति के पीछे-पीछे चलती हैं। जैसे सूर्य का प्रकाश मेरु पर्वत को नहीं छोड़ता, वैसे ही वे श्री राम का साथ नहीं छोड़तीं।॥24॥
 
‘Videhanandini Sita is fulfilled because she is following her husband like a shadow, being devoted to her husband. She does not leave Shri Ram's side just like the Sun's light does not leave Mount Meru.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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