श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.40.22 
संयच्छ वाजिनां रश्मीन् सूत याहि शनै: शनै:।
मुखं द्रक्ष्याम रामस्य दुर्दर्शं नो भविष्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'सूत! घोड़ों की लगाम खींचो। रथ को धीरे-धीरे चलाओ। हम श्री रामजी का मुख देखेंगे; क्योंकि अब हमें यह मुख देखना कठिन होगा॥ 22॥
 
‘Suta! Pull the reins of the horses. Take the chariot slowly. We will see the face of Shri Ram; because now it will be difficult for us to see this face.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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