श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.40.19 
तत् समाकुलसम्भ्रान्तं मत्तसंकुपितद्विपम्।
हयसिञ्जितनिर्घोषं पुरमासीन्महास्वनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस समय सम्पूर्ण अयोध्या में बड़ा कोलाहल मच गया। सब लोग व्याकुल और भयभीत हो गए। मतवाले हाथी श्री राम के वियोग में व्याकुल हो गए और घोड़ों की हिनहिनाहट और उनके आभूषणों की झनकार से वे इधर-उधर भागने लगे।॥19॥
 
At that time, a great uproar broke out in the whole of Ayodhya. Everyone was distraught and frightened. The drunken elephants became enraged at the separation from Shri Ram and the neighing of the horses and the tinkling of their ornaments echoed everywhere as they ran here and there.॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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