श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.40.14 
वनवासं हि संख्याय वासांस्याभरणानि च।
भर्तारमनुगच्छन्त्यै सीतायै श्वशुरो ददौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अपने पति के साथ जानेवाली सीता के लिए उसके ससुर ने वनवास के वर्षों की गणना करके उसके अनुसार वस्त्र और आभूषण दिए ॥14॥
 
For Sita who was to go with her husband, her father-in-law calculated the number of years of exile and gave her clothes and ornaments accordingly. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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