श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.40.13 
तं रथं सूर्यसंकाशं सीता हृष्टेन चेतसा।
आरुरोह वरारोहा कृत्वालंकारमात्मन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब सुन्दरी सीताजी शरीर पर सुन्दर आभूषण धारण करके प्रसन्न मन से सूर्य के समान तेजस्वी उस रथ पर आरूढ़ हुईं॥13॥
 
Then the beautiful Sita, wearing beautiful ornaments on her body, with a happy heart, mounted on that chariot as bright as the sun. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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