Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.40.10: तदनन्तर जैसे मातलि इन्द्र से कुछ कहते हैं, उसी प्रकार विनय के ज्ञाता सुमन्त्र ने हाथ जोड़कर ककुत्स्थ कुल के रत्न भगवान राम से कहा - ॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.40.10 
तत: सुमन्त्र: काकुत्स्थं प्राञ्जलिर्वाक्यमब्रवीत्।
विनीतो विनयज्ञश्च मातलिर्वासवं यथा॥१०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जैसे मातलि इन्द्र से कुछ कहते हैं, उसी प्रकार विनय के ज्ञाता सुमन्त्र ने हाथ जोड़कर ककुत्स्थ कुल के रत्न भगवान राम से कहा - ॥10॥
 
Thereafter, just as Matali says something to Indra, in the same manner Sumantr, the knower of humility, folded his hands and said to Lord Rama, the jewel of the Kakutstha clan - ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)