श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.4.41 
अमोघं बत मे क्षान्तं पुरुषे पुष्करेक्षणे।
येयमिक्ष्वाकुराजश्री: पुत्र त्वां संश्रयिष्यति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह बड़े हर्ष की बात है कि कमलनेत्र भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए मैंने जो व्रत और अनुष्ठान किए थे, वे आज सफल हुए हैं। बेटा! उसी के फलस्वरूप तुम्हें इक्ष्वाकुवंश की यह राजसी लक्ष्मी प्राप्त होगी।॥41॥
 
‘It is a matter of great joy that the fasts and rituals I had undertaken to please the lotus-eyed Lord Vishnu have been successful today. Son! As a result of that, you are going to get this royal goddess Lakshmi of the Ikshwaku clan.'॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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