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श्लोक  2.4.30 
तत्र तां प्रवणामेव मातरं क्षौमवासिनीम्।
वाग्यतां देवतागारे ददर्शायाचतीं श्रियम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वहां जाकर उन्होंने देखा कि माता कौशल्या मंदिर में बैठी हैं, रेशमी वस्त्र पहने हुए हैं और चुपचाप भगवान की पूजा कर रही हैं तथा राजलक्ष्मी से पुत्र प्राप्ति की प्रार्थना कर रही हैं।
 
Going there he saw mother Kausalya sitting in the temple, wearing silken clothes and silently worshipping the deity and praying to Rajlakshmi for a son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)