श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.4.23 
तस्मात् त्वयाद्यप्रभृति निशेयं नियतात्मना।
सह वध्वोपवस्तव्या दर्भप्रस्तरशायिना॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘इसलिए अब से तुम अपनी इन्द्रियों को वश में करके अपनी पत्नी सीता सहित रात्रि भर उपवास करो और कुशा की शय्या पर सो जाओ।॥ 23॥
 
‘Therefore, from this time onwards, remain in control of your senses and fast throughout the night along with your bride, Sita, and sleep on a bed of kusha grass.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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