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ramayan 2.4.14: 'वीर! मैंने भी इच्छित सुखों को भोग लिया है। मैंने अपने ऋण के साथ-साथ देवताओं, ऋषियों, पितरों और ब्राह्मणों का भी ऋण चुका दिया है।'   |   ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.4.14 
अनुभूतानि चेष्टानि मया वीर सुखान्यपि।
देवर्षिपितृविप्राणामनृणोऽस्मि तथाऽऽत्मन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'वीर! मैंने भी इच्छित सुखों को भोग लिया है। मैंने अपने ऋण के साथ-साथ देवताओं, ऋषियों, पितरों और ब्राह्मणों का भी ऋण चुका दिया है।'
 
'Valiant! I have also experienced the desired pleasures. I have repaid the debt of the gods, sages, ancestors and Brahmins as well as my own. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)