श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.4.12 
राम वृद्धोऽस्मि दीर्घायुर्भुक्ता भोगा यथेप्सिता:।
अन्नवद्भि: क्रतुशतैर्यथेष्टं भूरिदक्षिणै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘श्रीराम! अब मैं वृद्ध हो गया हूँ। मेरी आयु बहुत बढ़ गई है। मैंने अनेक इच्छित सुखों का भोग किया है और अन्न तथा बहुत-सी दक्षिणा सहित सैकड़ों यज्ञ भी किए हैं।॥12॥
 
‘Shri Ram! Now I have become old. My age has increased a lot. I have enjoyed many of the desired pleasures and have also performed hundreds of yagnas with food and lots of dakshina.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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