Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.39.9: दो घण्टे के बाद जब होश आया तो महाराज ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से सुमन्तराम की ओर देखा और इस प्रकार बोले-॥9॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.39.9 
संज्ञां तु प्रतिलभ्यैव मुहूर्तात् स महीपति:।
नेत्राभ्यामश्रुपूर्णाभ्यां सुमन्त्रमिदमब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दो घण्टे के बाद जब होश आया तो महाराज ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से सुमन्तराम की ओर देखा और इस प्रकार बोले-॥9॥
 
As soon as he regained consciousness after two hours, the Maharaja looked at Sumantram with tearful eyes and spoke thus -॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)