श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.39.8 
एवमुक्त्वा तु वचनं बाष्पेण विहतेन्द्रिय:।
रामेति सकृदेवोक्त्वा व्याहर्तुं न शशाक स:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहते-कहते राजा के नेत्रों में आँसू भर आए। उनकी इन्द्रियाँ क्षीण हो गईं और वे एक बार 'हे राम!' कहकर मूर्छित हो गए। वे आगे कुछ न बोल सके।॥8॥
 
‘While saying this, the king's eyes filled with tears. His senses became weak and he fainted after saying 'O Ram!' once. He could not say anything further.'॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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