| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति » श्लोक 41 |
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| | | | श्लोक 2.39.41  | मुरजपणवमेघघोषवद्
दशरथवेश्म बभूव यत् पुरा।
विलपितपरिदेवनाकुलं
व्यसनगतं तदभूत् सुदु:खितम्॥ ४१॥ | | | | | | अनुवाद | | राजा दशरथ का महल, जो मुरज, पणव और मेघ आदि वाद्यों की गम्भीर ध्वनि से गूंजता रहता था, अब विलाप और रुदन से भर गया और संकट के कारण अत्यन्त दुःखी दिखाई देने लगा ॥ 41॥ | | | | The palace of King Dasharatha, which used to reverberate with the deep sounds of musical instruments like the muraj, panava and megh, now became filled with lamentation and weeping and appeared very sad due to the crisis. ॥ 41॥ | | | इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे एकोनचत्वारिंश: सर्ग:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें उनतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३९॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
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