श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.39.4 
मन्ये खलु मया पूर्वं विवत्सा बहव: कृता:।
प्राणिनो हिंसिता वापि तन्मामिदमुपस्थितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्वजन्म में मैंने अनेक गायों को उनके बछड़ों से अलग किया होगा अथवा अनेक प्राणियों पर हिंसा की होगी; उसी के कारण आज मुझे यह विपत्ति झेलनी पड़ी है॥4॥
 
‘It seems that in my previous life I must have caused many cows to be separated from their calves or I must have caused violence against many living creatures; because of this, I have faced this calamity today.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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