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ramayan 2.39.35: ये चौदह वर्ष तुम्हें सोते हुए बीत जाएँगे, फिर एक दिन तुम देखोगे कि मैं सीता और लक्ष्मण के साथ सखाओं से घिरा हुआ पूर्णरूपेण यहाँ आ पहुँचा हूँ। ॥35॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.39.35 
सुप्तायास्ते गमिष्यन्ति नव वर्षाणि पञ्च च।
समग्रमिह सम्प्राप्तं मां द्रक्ष्यसि सुहृद्‍वृतम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ये चौदह वर्ष तुम्हें सोते हुए बीत जाएँगे, फिर एक दिन तुम देखोगे कि मैं सीता और लक्ष्मण के साथ सखाओं से घिरा हुआ पूर्णरूपेण यहाँ आ पहुँचा हूँ। ॥35॥
 
"These fourteen years will pass while you are sleeping, then one day you will see that I have arrived here completely with Sita and Lakshman, surrounded by my friends." ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)