श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.39.32 
सीताया वचनं श्रुत्वा कौसल्या हृदयङ्गमम्।
शुद्धसत्त्वा मुमोचाश्रु सहसा दु:खहर्षजम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
सीता के ये मधुर वचन सुनकर शुद्ध हृदय वाली देवी कौशल्या सहसा दुःख और हर्ष के आँसू बहाने लगीं।
 
Hearing these sweet words of Sita, the pure-hearted goddess Kausalya suddenly started shedding tears of sorrow and joy.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd