श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.39.29 
नातन्त्री वाद्यते वीणा नाचक्रो विद्यते रथ:।
नापति: सुखमेधेत या स्यादपि शतात्मजा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार वीणा बिना तारों के नहीं बजती तथा रथ बिना पहियों के नहीं चलता, उसी प्रकार स्त्री भी पति के बिना सुखी नहीं रह सकती, चाहे वह सौ पुत्रों की माता ही क्यों न हो।
 
Just as a Veena cannot be played without strings and a chariot cannot move without wheels, similarly a woman cannot be happy without a husband even if she is the mother of a hundred sons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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