Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.39.23: 'उत्तम कुल, उपकार, विद्या, आभूषण आदि का दान और संग्रह (पति द्वारा स्नेहपूर्वक गोद लिया जाना), ये सब दुष्ट स्त्रियों के हृदय को वश में नहीं कर सकते; क्योंकि उनका मन अशांत रहता है। | ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न कुलं न कृतं विद्या न दत्तं नापि संग्रह:।
स्त्रीणां गृह्णाति हृदयमनित्यहृदया हि ता:॥ २३॥
अनुवाद
'उत्तम कुल, उपकार, विद्या, आभूषण आदि का दान और संग्रह (पति द्वारा स्नेहपूर्वक गोद लिया जाना), ये सब दुष्ट स्त्रियों के हृदय को वश में नहीं कर सकते; क्योंकि उनका मन अशांत रहता है।
'A good family, favours done, knowledge, gifts of ornaments etc. and collection (of affectionate adoption by the husband), all these cannot subdue the heart of wicked women; because their mind is disturbed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥