श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.39.20 
असत्य: सर्वलोकेऽस्मिन् सततं सत्कृता: प्रियै:।
भर्तारं नानुमन्यन्ते विनिपातगतं स्त्रिय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
बेटी! जो स्त्रियाँ अपने प्रिय पतियों से सदैव आदर पाती हैं, किन्तु विपत्ति के समय उनका आदर नहीं करतीं, वे सम्पूर्ण जगत में असति (दुष्ट) कहलाती हैं।
 
Daughter! Those women who are always respected by their beloved husbands but do not respect them in times of trouble are known as 'Asati' (wicked) in the entire world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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