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ramayan 2.39.16: महाराज की यह बात सुनकर कोषाध्यक्ष कोष में गया और वहाँ से सब वस्तुएँ लाकर शीघ्रतापूर्वक सीता को सौंप दीं॥16॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.39.16 
नरेन्द्रेणैवमुक्तस्तु गत्वा कोशगृहं तत:।
प्रायच्छत् सर्वमाहृत्य सीतायै क्षिप्रमेव तत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज की यह बात सुनकर कोषाध्यक्ष कोष में गया और वहाँ से सब वस्तुएँ लाकर शीघ्रतापूर्वक सीता को सौंप दीं॥16॥
 
Upon hearing Maharaja say this, the treasurer went to the treasury and brought all the things from there and quickly handed them over to Sita.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)