vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति
»
श्लोक 16
श्लोक
2.39.16
नरेन्द्रेणैवमुक्तस्तु गत्वा कोशगृहं तत:।
प्रायच्छत् सर्वमाहृत्य सीतायै क्षिप्रमेव तत्॥ १६॥
अनुवाद
महाराज की यह बात सुनकर कोषाध्यक्ष कोष में गया और वहाँ से सब वस्तुएँ लाकर शीघ्रतापूर्वक सीता को सौंप दीं॥16॥
Upon hearing Maharaja say this, the treasurer went to the treasury and brought all the things from there and quickly handed them over to Sita.॥ 16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd