श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.39.15 
वासांसि च वरार्हाणि भूषणानि महान्ति च।
वर्षाण्येतानि संख्याय वैदेह्या: क्षिप्रमानय॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'तुम शीघ्रता से विदेह राजकुमारी सीता को पहनने के लिए बहुमूल्य वस्त्र और आभूषण गिनकर ले आओ, जो चौदह वर्षों के लिए पर्याप्त हों।'॥15॥
 
'You count and quickly bring the precious clothes and ornaments that Videha princess Sita should wear, which should be sufficient for fourteen years.'॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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