श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.39.13 
तं रथं राजपुत्राय सूत: कनकभूषितम्।
आचचक्षेऽञ्जलिं कृत्वा युक्तं परमवाजिभि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब सूत सुमन्तराम ने हाथ जोड़कर कहा, 'महाराज! उत्तम घोड़ों से जुता हुआ एक स्वर्ण रथ राजकुमार राम के लिए तैयार है।'
 
Then Suta Sumantram folded his hands and said, 'Maharaj! A golden chariot drawn by excellent horses is ready for Prince Rama.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)