श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.39.10 
औपवाह्यं रथं युक्त्वा त्वमायाहि हयोत्तमै:।
प्रापयैनं महाभागमितो जनपदात् परम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तुम यहाँ सवारी के योग्य एक रथ लाओ, जिसमें उत्तम घोड़े जुते हों और उस पर इन महान श्री रामजी को बिठाकर इस जनपद से बाहर ले जाओ॥ 10॥
 
‘You bring here a chariot fit for riding with excellent horses harnessed to it and place this great Sri Rama on it and take him out of this district.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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