श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.38.9 
मृगीवोत्फुल्लनयना मृदुशीला मनस्विनी।
अपकारं कमिव ते करोति जनकात्मजा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिनके नेत्र मृग के समान उज्ज्वल हैं, जिनका स्वभाव अत्यंत कोमल और मधुर है, वे बुद्धिमान जनकनन्दिनी आपका क्या अपराध कर रही हैं?॥9॥
 
'Whose eyes are as bright as those of a deer, whose nature is extremely gentle and sweet, what crime is that intelligent Janakanandini doing to you?॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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