श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.38.8 
रामेण यदि ते पापे किंचित्कृतमशोभनम्।
अपकार: क इह ते वैदेह्या दर्शितोऽधमे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'अरे नीच पापी! यदि श्री रामजी ने तेरा कोई अपराध किया है (तूने उन्हें वनवास में भेज ही दिया है), तो विदेहनन्दिनी सीता ने तेरा क्या बिगाड़ा है, जो तुझे ऐसा दण्ड मिलना चाहिए?॥8॥
 
'You vile sinner! If Shri Ram has committed any crime against you (you have already sent him into exile), what wrong has Videhanandini Sita done to you that deserves such a punishment?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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