श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.38.12 
तत्त्वेतत् समतिक्रम्य निरयं गन्तुमिच्छसि।
मैथिलीमपि या हि त्वमीक्षसे चीरवासिनीम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इसका उल्लंघन करके तुम मिथिला की पुत्री जानकी को भी छाल के वस्त्र पहने देखना चाहते हो। ऐसा प्रतीत होता है कि तुम नरक जाना चाहते हो॥12॥
 
“Violating this, you wish to see even the daughter of Mithila, Janaki, wearing bark clothes. It seems that you wish to go to hell.”॥ 12॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd