श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.37.5 
खनित्रपिटके चोभे समानयत गच्छत।
चतुर्दश वने वासं वर्षाणि वसतो मम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
"दसियों! जाओ और ये दो चीज़ें ले आओ - एक खंती (एक प्रकार की कुदाल) और एक पेटारी (कुदाल) या एक कुदाल और एक कुदाल। ये चीज़ें चौदह साल तक जंगल में रहने के काम आएंगी।"
 
‘Dasiyas! Go and bring these two things – a khanti (a kind of a pickaxe) and a petari (a hoe) or a spade and a hoe. These things will be useful for living in the forest for fourteen years.’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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