श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.37.29 
न हि तद् भविता राष्ट्रं यत्र रामो न भूपति:।
तद् वनं भविता राष्ट्रं यत्र रामो निवत्स्यति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'याद रखो, जहाँ श्री राम राजा नहीं होंगे, वह राज्य, राज्य नहीं रहेगा; वह जंगल बन जाएगा। और जहाँ श्री राम निवास करेंगे, वह जंगल एक स्वतंत्र राष्ट्र बन जाएगा॥ 29॥
 
‘Remember, wherever Shri Ram will not be the king, that kingdom will no longer be a kingdom; it will become a jungle. And wherever Shri Ram will reside, that forest will become an independent nation.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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