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श्लोक 2.37.28  |
तत: शून्यां गतजनां वसुधां पादपै: सह।
त्वमेका शाधि दुर्वृत्ता प्रजानामहिते स्थिता॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| 'तो फिर तुम वृक्षों के साथ अकेली रहकर इस निर्जन और वीरान पृथ्वी पर राज्य करो। तुम बड़ी दुष्ट स्त्री हो और प्रजा का अनिष्ट करने में लगी रहती हो।॥28॥ |
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| ‘Then you should live alone with the trees and rule this desolate and deserted earth. You are a very wicked woman and are engaged in harming the people.॥ 28॥ |
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