श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.37.1 
महामात्रवच: श्रुत्वा रामो दशरथं तदा।
अभ्यभाषत वाक्यं तु विनयज्ञो विनीतवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
प्रधान मंत्री के पूर्वोक्त वचन सुनकर विनय के ज्ञाता श्री राम ने राजा दशरथ से विनयपूर्वक कहा-॥1॥
 
On hearing the aforesaid words of the Prime Minister, Sri Rama, the knower of humility, then humbly said to King Dasharatha -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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