श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 36: दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.36.24 
तं यानं शीघ्रमारोप्य सभार्यं सपरिच्छदम्।
यावज्जीवं विवास्योऽयमिति तानन्वशात् पिता॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पिता ने शीघ्र ही अपने पुत्र को उसकी पत्नी और समस्त आवश्यक वस्तुओं सहित रथ पर बिठाया और अपने सेवकों को आज्ञा दी, "इसे जीवनपर्यन्त राज्य से निकाल दो।"॥24॥
 
‘The father quickly placed his son, along with his wife and all the necessary goods, on a chariot and ordered his servants, “Expel him from the kingdom for the rest of his life.”॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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