श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 36: दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.36.22 
क्रीडतस्त्वेष न: पुत्रान् बालानुद्‍भ्रान्तचेतस:।
सरय्वां प्रक्षिपन्मौर्ख्यादतुलां प्रीतिमश्नुते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! वे हमारे छोटे-छोटे बच्चों को खेलते समय पकड़ लेते हैं और जब वे बहुत डर जाते हैं, तो उन्हें सरयू में फेंक देते हैं। इस मूर्खतापूर्ण कार्य से उन्हें अपार सुख मिलता है।’॥22॥
 
‘Maharaj! They catch our small children while they are playing and when they become very frightened, they throw them in the Saryu. By doing this foolishly they get immense pleasure.’॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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