श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 36: दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.36.16 
तवैव वंशे सगरो ज्येष्ठपुत्रमुपारुधत्।
असमञ्ज इति ख्यातं तथायं गन्तुमर्हति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके ही वंश में प्रथम राजा सगर हुए थे, जिन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र असमंज को राज्य से निकाल कर उसके लिए सदा के लिए राज्य के द्वार बंद कर दिए थे। उसी प्रकार उन्हें भी यहाँ से चले जाना चाहिए।॥16॥
 
‘Maharaj! In your own lineage, the first king Sagara had been the one who expelled his eldest son Asamanja and closed the doors of the kingdom for him forever. In the same way, he too should leave from here.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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