श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.35.8 
मावमंस्था दशरथं भर्तारं वरदं पतिम्।
भर्तुरिच्छा हि नारीणां पुत्रकोटॺा विशिष्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ तुम्हारे पति, पालनहार और हितैषी हैं। उनका अपमान मत करो। स्त्रियों के लिए पति की इच्छा करोड़ों पुत्रों से भी अधिक महत्वपूर्ण है। 8.
 
King Dasharath is your husband, caretaker and benefactor. Do not insult him. For women, the wish of a husband is more important than millions of sons. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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