श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.35.33 
परिवादो हि ते देवि महाँल्लोके चरिष्यति।
यदि रामो वनं याति विहाय पितरं नृपम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'देवि! यदि श्री राम अपने पिता राजा दशरथ को छोड़कर वन में चले जाएँ, तो संसार में आपकी बड़ी निन्दा होगी।॥33॥
 
'Devi! If Shri Ram leaves his father King Dasharath and goes to the forest, you will be greatly criticized in the world. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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