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श्लोक 2.35.28  |
सत्यश्चात्र प्रवादोऽयं लौकिक: प्रतिभाति मा।
पितॄन् समनुजायन्ते नरा मातरमङ्गना:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| ‘आज मुझे यह कहावत बिल्कुल सत्य प्रतीत हो रही है कि पुत्र अपने पिता के समान होते हैं और पुत्रियाँ अपनी माता के समान होती हैं।॥28॥ |
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| ‘Today I find the proverb that sons are like their fathers and daughters are like their mothers to be absolutely true.॥ 28॥ |
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