श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.35.23 
माता ते पितरं देवि पुन: केकयमब्रवीत्।
शंस मे जीव वा मा वा न मां त्वं प्रहसिष्यसि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
देवि! यह सुनकर तुम्हारी राजमाता ने तुम्हारे पिता केकयराज से फिर कहा - 'चाहे तुम जीवित रहो या मरो, मुझे इसका कारण बताओ। भविष्य में तुम फिर मेरा उपहास नहीं कर सकोगे।'॥23॥
 
Devi! On hearing this, your queen mother again said to your father Kekayaraja - 'Whether you live or die, tell me the reason. In future you will not be able to make fun of me again.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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